ज्ञान सरोवर में धार्मिक सेवा प्रभाग के द्वारा अखिल भारतीय सम्मेलन

संसार दर दर भटकता है सुख के लिए : राजयोगिनी डॉक्टर निर्मल दीदी

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ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),22 जुलाई २०१६। आज ​​ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था , धार्मिक जन सेवा प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था – “राजयोग द्वारा स्वस्थ और सुखी समाज की स्थापना “. इस सम्मलेन में भारत वर्ष के सभी प्रांतो से बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का ​​उद्घाटन सम्पन्न हुआ।

ज्ञान सरोवर अकादमी की निदेशक राजयोगिनी डॉक्टर निर्मल दीदी जी ने आज अपना आशीर्वचन इस प्रकार दिया . कहा कि सुख के लिए संसार दर दर भटकता है . लोगों को धन की कामना रहती है . मकान -गाडी -बैंक बैलेंस चाहते हैं . मगर इनसे सुख शांति नहीं आती -स्वास्थ नहीं आता है . जब हमारा अंदर का दीपक जग जाता है -दिव्य बुद्धि की प्राप्ति होती है तब हम सर्व शक्तिमान परमात्मा से सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं . लोगों के पास नॉलेज है मगर उसको धारण करने की शक्ति नहीं है . आप सभी ये सन्देश लेकर जाएँ की विश्व को सुखमय और शांत बनने का काम हमारा है . जब सभी एक भगवान् को जानेंगे तब लड़ाई बंद हो जाएगी . अपना जीवन सुखमय और शांत बना कर हम संसार को वैसा बना पाएंगे . निःस्वार्थ भाव से -प्रेम से जब परमात्मा को याद करेंगे तो हम भी मास्टर सर्व शक्तिमान बन जायेंगे .

धार्मिक जन सेवा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका राजयोगिनी मनोरमा बहन ने कहा कि इस सम्मेलन का लक्ष्य है कि संत समाज को एक साथ एक मंच पर देखना . ऐसा देखकर तृप्ति होती है. वर्ष में एक या दो बार हम ऐसा कार्य क्रम करते हैं .
सभी सुखी हों -सभी स्वस्थ हों – ऐसी ही शुभ भावना से इस सममेलन का आयोजन किया गया है . संसार को सुखमय बनने के लिए सभी संतों ने गैरिक धारण किया है . अन्य ने भले ही गैरिक धारण ना किये हों -तथापि अपनी अपनी शक्ति भर अपने अपने तरीके से वे सभी भी दुनिया के कल्याण के लिए कृत संकल्प हैं और रात दिन सेवा रत हैं . सहज मार्ग से भी सर्वोच्च सुख और शांति प्राप्त करने का मार्ग परमात्मा ने ब्रह्मा कुमारीज के माध्यम से दुनिया के कल्याण के लिए प्रदान किया है. इस मार्ग के चयन से हम सभी शारीरिक के साथ साथ मानसिक रूप से भी स्वस्थ बनते हैं और लाखों लोगों ने ऐसा लक्ष्य प्राप्त भी किया है .

श्री श्री 1008 सुरेन्द्र दास जी महराज -कटनी ने अपनी शुभ कामनायें दीं और कहा की मैं संत नहीं सेवक हूँ . आपने कहा कि यह धरा स्वर्ग है जहां यह कार्य क्रम ( ज्ञान सरोवर ) चल रहा है . आपने कहा कि ऐसा कहते हुए मुझे गर्व हो रहा है . मैंने पहले ऐसा सुना था आज उस स्वर्ग को साक्षात देख रहा हूँ . इन ब्रह्मा कुमारी बहनो की इतनी तपस्या को मैं अनेक वर्षों से देख रहा हूँ -इतना त्याग और किसी के पास हो नहीं सकता .

श्री माँ सिद्ध शक्ति जी,सिद्ध शक्ति पीठ , दिल्ली ने कहा कि सभी महापुरुष आज एक मंच पर आये हैं और सभी मानते हैं की सभी धर्म एक सामान है . भारत को फिर से अपनी एकता से सोने की चिड़िया बनाना है . सभी आत्मायें उस परमात्मा के साथ एकाकार हो जायें. सभी सुखी और स्वस्थ हो जायेंगे . विज्ञान मंगल पर पंहुचा है मगर अंतर तक नहीं आ पाया है . अंगों को ट्रांस प्लांट कर सकती है मगर मन को नहीं .

जैन मुनि भाई अरविन्द कुमार जी , पटियाला ने अपनी शुभ कामनायें इस प्रकार दीं . आपने कहा कि आज हवा का रुख है कल क्या पता रहे न रहे , आज हमारे सन्मुख है -कल रहे न रहे – मानव जीवन – और ऐसी सुन्दर धरा के इस प्रांगण में – अलग अलग मन मतान्तर के सारे धर्म गुरु यहां उपस्थिति हैं . यहां की तरंगे सुमधुर हैं -कथनी करनी की समानता है . आत्म भावी आत्माएं रमन करती हैं यहां . अद्भुत है यह स्थली शिव बाबा की . दादी जानकी जी गजब का समन्वय लिए हैं -मातृ रूप हैं -प्रेम रूप हैं . त्याग और तपस्या की नींव पर खड़ी है यह भूमि . अज्ञान के अन्धकार को मिटाने का महान कार्य यहां से चल रहा है . सम्मलेन सफल होगा और सु फल देगा .

फादर जॉय एस सिंह पलवल ने कहा कि मैं पहली बार यहां आया हूँ . यहां आने के लिए परमात्मा का मैं धन्यवाद करता हूँ . पिता परमेश्वर पवित्र है और आत्म रूप हैं . मैं अपनी शांति आपको देता हूँ . यहां का माहौल काफी पवित्र और सुंदर है. आपका यह आयोजन रियली सफल होगा और अनेक लोगों को जीवन को धन्य बनाएगा . सुखी और स्वस्थ रहना आप पर निर्भर है . आप चाहें तो आपका जीवन बदल सकता है .

बाबा सुखदेव जी ग्रन्थी , करनाल ने अपनी शुभ कामनाएं दीं . कहा की प्यार सबसे ऊंचा है . संत का मतलब क्या है ? इसका अर्थ मैं यहां समझ पाया . यहां हर एक बन्दे के अंदर परमात्मा की ज्योत देखी है . बहनें यहां की वास्तविक संत हैं . इनका त्याग और इनकी तपस्या ने इनको संत बन दिया है . अगर स्वर्ग की कोई प्रतिमा या रूप है तो वो यहां ज्ञान सरोवर में दिख रहा है .

भाई एम एस नदवी , इस्लामिक मेडिएशन सेंटर , फरीदाबाद के सचिव ने कहा कि यहां का आपसी भाईचारा और प्रेम अद्भुत है . इसी लिए सभी धर्मों के लोग यहां एक मंच पर हैं . सुकून से हैं . सुकून सिर्फ अल्ला के ध्यान में – याद में मिलेगा . इनके जीवन से सुकून नज़र आता है . ये प्रमाण है की ये सभी खुदा के बन्दे हैं . इंसानियत के कारण हम सभी एक दूसरे से प्रेम कर पाते हैं .
वह प्रेम यहां प्राप्त है . तुम (खुद ) बदल जाओ तो यारो कायनात बदल सकते हैं .

परा वैज्ञानिक श्री ओजप्रिय ओजस्वी जी , गाजियाबाद , ने कहा कि मुझे यहां स्वर्ग वासी होने का सौभाग्य मिला है . ये सभी आत्मायें सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हैं . यहां आने में मैं लेट हो गया – पहले आना था .

दिव्यानन्द सुरेश्वरि जी महाराज ने कहा कि सोच बदल लो सितारे बदलेंगे . अपने को बदल लो ज़माना बदल जायेगा . इस धरती पर एकता , प्रेम ,अहिंसा , एकता ,सेवा का समावेश नज़र आता है . यहां आने के बाद महसूस हुआ है की रियली स्वर्ग यहीं पर है ज्ञान सरोवर में है .

धार्मिक जन सेवा प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बी के रामनाथ ने आज के अवसर पर कहा कि हम सभी खुदा के बन्दे हैं और वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को सत्य प्रमाणित कर रहे हैं . अलग अलग धर्मों के हम सभी लोग आज एक साथ इस मंच पर शोभायमान हैं . अब हमें अपने आचरण में एका लानी है . सभी उंगलियां मिलकर कुछ भी कर सकती हैं मगर अलग अलग उंगलियां उपयोगी नहीं हैं . इसलिए समाज की बेहतरी के लिए , समाज के सभी जनो को मिलकर साथ चलना होगा . आध्यात्मिकता के सशक्तिकरण से हम सभी ऐसा कर पाएंगे .

इस बीच संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी जी ने भी विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से सभी प्रतिनिधियों को सम्बोधित किया . दादी जी ने कहा कि हम एक हैं और एक के हैं . दिल , दिमाग और दृष्टि को शुद्ध रखेंगे तो परिस्थितियां चली जायेंगी .

Sarva Dharma Sammelan

Sarva Dharma Sammelan at Sinheswar (Madhepura) Bihar

Religious Wing Conference at Gyan Sarovar – Mount Abu

Sarva Dharma Sammellan in Gandhidham (Kutchh-Gujarat)

धार्मिक प्रभाग कि ओर से मनमोहिनी वन में आयोजित सम्मलेन